गृहणी की व्यंग्य व्यथा

मै संगठित दृढ़ निश्चय की गृहिणी ,मेरा जीवन  नित्य रचता कथा  बस ये ही स्पष्ट नहीं है, इसे व्यंग्य कहूं  या व्यथा ।।   निर्णय लेने का गौरव मुझको ही प्राप्त है मेरा प्रभाव घर के हर कोने में व्याप्त  है किसमें साहस है जो मुझसे जीत जाए संवाद में बस हार जाती हूं प्रतिदिन […]